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प्रशासन की नाक के नीचे भूमाफिया का खेल: रंगवासा में सरकारी और गोचर जमीन पर अवैध कॉलोनी, 2 साल बाद भी कार्रवाई शून्य

सूत्रों बताते हैं राहुल तंवर के साथ कई अधिकारियों की भी हे मिली भकत , दबंग देश जल्द करेगा पूरे मामले का खुलासा

इंदौर / राऊ तहसील के ग्राम रंगवासा में सरकारी जमीनों पर रसूखदारों और भूमाफिया के गठजोड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। रंगवासा स्थित सर्वे क्रमांक 1 एवं 4 की करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर पिछले दो वर्षों से न सिर्फ अवैध कब्जा चल रहा है, बल्कि वहां बिना किसी अनुमति के धड़ल्ले से ‘लक्ष्य विहार’ नामक अवैध कॉलोनी भी काट दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम से लेकर कलेक्टर और संभागायुक्त तक शिकायत होने के बाद भी प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बना बैठा है।

 

*तत्कालीन संभागायुक्त के आदेश भी हवा में उड़े*

 

सूत्रों के मुताबिक, करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन संभागायुक्त दीपक सिंह ने संबंधित भूमि को शासकीय घोषित कर उसे तत्काल कब्जे में लेने के कड़े निर्देश दिए थे। लेकिन निचले स्तर के राजस्व अधिकारियों की साठगांठ के चलते संभागायुक्त के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मौके पर आज भी भूमाफिया राहुल तंवर द्वारा धड़ल्ले से सड़क, बाउंड्री वॉल और अन्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

 

*बिना TNCP और RERA के कैसे मिल गई नगर परिषद से अनुमति?*

 

इस पूरे खेल में राऊ नगर परिषद की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। नेहरू नगर के पीछे, रंगवासा क्षेत्र में विकसित की गई इस ‘लक्ष्य विहार’ कॉलोनी के पास न तो टीएनसी (Town and Country Planning) की अनुमति है, न ही यह रेरा (RERA) से अप्रूव्ड है। इसके बावजूद नगर परिषद ने यहां धड़ल्ले से मकान बनाने की अनुमतियां (Building Permissions) जारी कर दीं। आज स्थिति यह है कि कॉलोनी में न तो पानी की टंकी है और न ही बुनियादी सुविधाएं, जिससे यहां प्लॉट खरीदने वाले आम लोग भी ठगे जा रहे हैं।

 

*आदिवासी और गोचरण की जमीन भी निगली!*

 

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए, तो एक बहुत बड़ा जमीन घोटाला उजागर हो सकता है। आरोप है कि शासकीय भूमि के साथ-साथ यहां आदिवासियों की जमीनों और मवेशियों के चरने वाली ‘गोचर’ की भूमि पर भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।

 

*अधिकारियों और राजनेताओं का ‘वरदहस्त’*

 

चर्चा है कि इस पूरे मामले में एक छोटे से कॉलोनाइजर राहुल तंवर के पीछे कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार राजनेताओं का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि इसी राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के कारण पटवारी, आरआई और तहसीलदार स्तर पर शिकायतों को दबा दिया जाता है। हर बार शिकायतकर्ताओं को केवल जांच का आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

 

जांच का विषय: आखिर किसकी शह पर करोड़ों की सरकारी जमीन को कौड़ियों के दाम पर बेचकर अवैध कॉलोनियां खड़ी कर दी गईं? क्या इंदौर का जिला प्रशासन इन रसूखदार भूमाफियाओं पर बुलडोजर चलाएगा या कागजी आश्वासनों का खेल यूं ही चलता रहेगा? 1783265367930

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